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Posted on Nov 30, 2015 in Bal Kavita, Devotional Poems, Old Classic Poems | 0 comments

जसोदा हरि पालने झुलावे – सूरदास

जसोदा हरि पालने झुलावे – सूरदास

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On the auspicious occasion of Janmashtami, here are two short poems of Surdas on baby Krishna. Rajiv Krishna Saxena

जसोदा हरि पालनैं झुलावै

जसोदा हरि पालनैं झुलावै।
हलरावै, दुलराइ मल्हावै,
जोइ-जोइ कछु गावै॥

मेरे लाल कौं आउ निंदरिया,
काहैं न आनि सुवावै।
तू काहैं नहिं बेगहिं आवै,
तोकौं कान्ह बुलावै॥

कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं,
कबहुँ अधर फरकावै।
सोवत जानि मौन ह्वै कै रहि,
करि-करि सैन बतावै॥

इहिं अंतर अकुलाइ उठे हरि,
जसुमति मधुरैं गावै।
जो सुख सूर अमर-मुनि दुरलभ,
सो नँद-भामिनि पावै॥

गोपाल झूलन

पालनैं गोपाल झुलावैं।
सुर मुनि देव कोटि तैंतीसौ
कौतुक अंबर छावैं ॥१॥

जाकौ अन्त न ब्रह्मा जाने,
सिव सनकादि न पावैं।
सो अब देखो नन्द जसोदा,
हरषि हरषि हलरावैं ॥२॥

हुलसत हँसत करत किलकारी
मन अभिलाष बढावैं।
सूर श्याम भक्तन हित कारन
नाना भेष बनावै ॥३॥

~ सूरदास

 
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