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Posted on Feb 24, 2016 in Nostalgia Poems | 0 comments

दीदी के धूल भरे पाँव – धर्मवीर भारती

दीदी के धूल भरे पाँव – धर्मवीर भारती

दीदी के धूल भरे पाँव बरसों के बाद आज फिर यह मन लौटा है क्यों अपने गाँव; अगहन की कोहरीली भोर: हाय कहीं अब तक क्यों दूख दूख जाती है मन की कोर! एक लाख मोती, दो लाख जवाहर...

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