My Gazal

Submitted / Updated On: Friday, May 16, 2008 | Written By: Anuj

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मुहब्बत की थी तो निभाई तो होती
कोई प्यार की ज्योति जलाई तो होती

भूले से गर खता हो गई थी हमसे
कभी आकर तुमने बताई तो होती

औरों को वफा की सीख देने वाले
ये सीख खुद तूने अपनाई तो होती

वफा का बेवफाई से क्यूं दिया सिला
कमियाँ क्या थी गिनाईं तो होती

अनुज मुझ पे लिख डाली किताब तूने
कोई ग़ज़ल खुद पे बनाई तो होती

Contributing Poet Dr.Anuj Narwal Rohtaki
454/33 Naya Padav, Khat Mandi, Rohatak - Hariyana